Darbar Film Review In Hindi || दरबार फ़िल्म हिंदी रिव्यु - Review Mirchi

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Wednesday, 15 January 2020

Darbar Film Review In Hindi || दरबार फ़िल्म हिंदी रिव्यु

 दरबार मूवी रिव्यु 


दरबार मूवी रिव्यु:- इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कम  ऐसे एक्टर है,  जिनकी फिल्में कंटेंट, स्टोरी, एक्टिंग  बहुत ऊपर होती हैं| बस देखने को मिलता है तो  फैंस का दिल खोलकर प्यार   जिसकी वजह से ये एक्टर सुपरस्टार से मेगास्टार बन जाते हैं|


मैं बात कर रहा हूं इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े नामों में से एक रजनीकांत सर की जो अपने फिल्म की तरफ से अपनी ऑडियंस को गिफ्ट देते हैं और रिलीज डेट को एक फेस्टिवल की तरह मना देते हैं | ट्रैटर में ऐसा सेलिब्रेशन देखने को मिलता है, जिसके सामने बड़े से बड़े पटाखे की आवाज भी फीकी पड़ जाती है, एक बार फिर वह वापस लौट आए हैं एक ऐसी फिल्म को लेकर जिसमें बहुत सारा एक्शन है, कॉमेडी है, एंटरटेनमेंट है | हेलो दोस्तों मैं हूं मनीष वेलकम तू "फिल्मी रिव्यू ऑफ दरबार"|

फ़िल्म की कहानी :-

फिल्म की कहानी आदित्य अरुणाचलम के पुलिस कमिश्नर के इर्द गिर्द लिखी गई है, जो खुद को एक बेड कॉप बुलाते है। और बड़े-बड़े गैंगस्टर वगैरह को चुटकियों में बुरी तरह पीट कर रख देते हैं इनका खौफ इतना ज्यादा है कि बड़े-बड़े बदमाश भी खुद चलकर अरेस्ट होने के लिए बाहर आ जाते है। कमिश्नर साहब के आगे सब फेल हो जाते हैं, कहने के लिए तो यह पुलिस के रूल्स एंड रेगुलेशंस मैं फंसे हुए हैं लेकिन इनका अंदाज थोड़ा अलग है। यह अच्छे लोगों के लिए देवता बराबर है और बुरे लोगों के लिए राक्षस बनकर प्रकट हो जाते हैं।

ऐसे में इनकी लाइफ में एंट्री मारते हैं, हरि चोपड़ा नाम के एक पावरफुल गैंगस्टर जो पुलिस वालों को सीधा नर्क के दर्शन कराते हैं और मुंबई में अपना डर फैलाना चाहते हैं। अब इस आर पार की लड़ाई में आखिर जीत किसकी होगी ? खुद को बेड कॉप बुलाने वाले रजनीकांत सरकी या फिर उस गैंगस्टर की जो पर्सनल दुश्मनी की वजह से पुलिस वालों की जान का दुश्मन बना हुआ है। क्या आदित्य सचमुच इस कहानी के हीरो है या छिपा हुआ एक सीक्रेट एजेंडा है जिसको वे छिपाने की कोशिश कर रहे हैं? इन सभी प्रश्नों के जवाब देने की कोशिश करती है फिल्म दरबार

 फिल्म के डायरेक्टर हैं AR Murugadoss जो गजनी, होलीडे जैसी मूवी को डायरेक्ट कर चुके हैं, लेकिन दरबार में ऐसा लगता है जैसे वह किसी एक्सपेक्टेशन के प्रेशर में दब गए हो जिसकी वजह से यह फिल्म परफेक्ट होने से थोड़ी सी चूक जाती है। नयनतारा हमेशा की तरह काफी फ्रेश लग रही हैं और फिल्म में अपनी एक छवि छोड़ देती है। रजनी सर के साथ उनकी कॉमेडी रोमांस देखने में मजा आता है और बीच-बीच में एक्शन से थोड़ा ब्रेक भी मिल जाता है सुनील शेट्टी (विलेन) कैरेक्टर में बहुत अच्छे लगते हैं उनका रोल जरूरी है लेकिन फिल्म का फोकस रजनी सर के ऊपर रखा गया है।

देखे या ना देखे :- 

अगर आप रजनी सर के फैन हैं तो दरबार आपके लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है, फिल्म में उनका स्ट्रांग अवतार नजर आने वाला है जो एक्शन में माहिर है और दुश्मनों को चुन-चुन कर पीट देता है। लेकिन अगर आप स्ट्रांग कंटेंट और यूनिक कहानी ढूंढते हुए थिएटर में जा रहे हैं तो आप थोड़ा सा उदास हो सकते हैं इसलिए फिल्म से ज्यादा उम्मीदें मत रखना आपका दिल टूट सकता है।

मेरी तरफ से दरबार को 5 में से 2.5 स्टार। 1 स्टार रजनी सर की पावरफुल परफॉर्मेंस के लिए, 1 स्टार फिल्म में डाले गए इनोवेटिव आइडिया के लिए, .5 स्टार काले धंधे जैसे इश्यूज को हाईलाइट करने के लिए।

बात करें नेगेटिव्स की तो 1 स्टार कटेगा स्टोरीलाइन के लिए 1 स्टार कमजोर डायरेक्शन के लिए और .5 फिल्म को थोड़ा लंबा खींचने के लिए। 

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